मक्का उत्पादन और उपभोग बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम: जानिए सरकार की नई पहलें

भारत में मक्का अब सिर्फ एक परंपरागत अनाज नहीं रहा — यह भोजन, पशु-चारा, औद्योगिक उत्पाद, और जैव-ईंधन जैसे कई क्षेत्रों में उपयोगी होता जा रहा है। बदलती मांग को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकारें अब मक्का उत्पादन और उपभोग को बढ़ाने के लिए गंभीर प्रयास कर रही हैं।


7 जुलाई 2025 को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली में FICCI (फिक्की) और भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थान (IIMR) द्वारा आयोजित 11वें भारत मक्का शिखर सम्मेलन का उद्घाटन किया।

इस सम्मेलन में उन्होंने कहा:

मक्का जैसी फसलों का देश की खाद्य सुरक्षा, जल संरक्षण और जैव-ईंधन नीति में बड़ा योगदान हो सकता है।

सम्मेलन का उद्देश्य था:

  • मक्का उत्पादन को बढ़ावा देना
  • प्रसंस्करण और स्टोरेज से जुड़ी समस्याओं को हल करना
  • किसानों को बाज़ार, तकनीक और समर्थन योजनाओं से जोड़ना

  • बीज पर 50% तक सब्सिडी
  • ₹15,000 प्रति क्विंटल तक सहायता
  • स्वीट कॉर्न, पॉपकॉर्न, बेबी कॉर्न जैसी वैरायटी को भी योजना में शामिल किया गया है
  • लक्ष्य: 2027 तक मक्का उत्पादन को दोगुना करना
  • मक्का ड्रायर और प्रसंस्करण उपकरणों पर अतिरिक्त सब्सिडी

उत्तर प्रदेश सरकार ने पहली बार मक्का की सरकारी खरीद MSP पर शुरू की है।

  • निर्धारित मूल्य: ₹2,225 प्रति क्विंटल
  • किसानों को अब बाजार में दाम की अनिश्चितता से राहत मिलेगी

  • 12,000 हेक्टेयर भूमि पर पायलट प्रोजेक्ट
  • मक्का की खेती पर ₹17,500 प्रति हेक्टेयर का प्रोत्साहन
  • उद्देश्य: जल-संकट वाले इलाकों में धान की जगह कम जल-खपत वाली फसलें प्रोत्साहित करना

सरकार मक्का को इथेनॉल उत्पादन के मुख्य स्रोत के रूप में देख रही है ताकि पेट्रोल पर निर्भरता कम की जा सके।

  • बिहार, मध्य प्रदेश और तेलंगाना जैसे राज्यों में मक्का आधारित इथेनॉल प्लांट्स की योजना
  • केंद्र द्वारा निजी निवेश को बढ़ावा देने की नीति अपनाई जा रही है

क्षेत्रलाभ
किसानअधिक आमदनी, बाजार सुनिश्चित, कम लागत
पर्यावरणजल संरक्षण, कम रसायन उपयोग, जलवायु संतुलन
उद्योगजैव ईंधन, पशु चारा, फूड प्रोसेसिंग में स्थायित्व
रोजगारग्रामीण युवाओं के लिए नई संभावनाएं

मक्का के प्रति सरकारी और औद्योगिक दोनों स्तरों पर नई जागरूकता पैदा हो रही है। 11वें भारत मक्का शिखर सम्मेलन इसका प्रतीक है कि सरकार अब पारंपरिक से आगे बढ़कर बहुउपयोगी फसलों पर ध्यान केंद्रित कर रही है। उत्पादन और उपभोग दोनों स्तरों पर इन योजनाओं से आने वाले वर्षों में मक्का भारत की आर्थिक, जैविक और ऊर्जा नीति का अहम हिस्सा बन सकता है।

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