“सपना अगर बड़ा है, तो नींद खुद टूट जानी चाहिए। अलार्म तो सिर्फ कमज़ोरों के लिए होता है!”
कब तक सोएगा?
कब तक हर रोज़ ‘कल से शुरू करूंगा’ बोलकर खुद को धोखा देता रहेगा?
तू जिंदा है — तो फिर तेरी आँखों में आग क्यों नहीं है?
तू जवान है — तो फिर तेरे कदम थमे क्यों हुए हैं?
तू खुद को पहचान क्यों नहीं रहा?
तेरी औकात क्या है, ये तुझे भी नहीं पता… क्योंकि तूने अभी खुद को पूरी ताक़त से झोंका ही नहीं!
ये जिंदगी दोबारा नहीं मिलेगी!
सोच —
जिस दिन तू मर जाएगा, उस दिन ये बहाने भी तेरे साथ दफना दिए जाएंगे।
ना कोई पूछेगा तू क्यों नहीं कर पाया,
ना कोई तेरी मजबूरियों की कहानी सुनेगा।
दुनिया सिर्फ नतीजे देखती है — कोशिशें नहीं।
अगर कुछ करके दिखाया, तो ही तेरा नाम होगा…
वरना भीड़ का एक चेहरा बनकर खो जाएगा।
अब फैसला कर – हार माननी है या खुद को फाड़कर जीत निकालनी है?
तू किस दिन का इंतज़ार कर रहा है?
कोई तेरे लिए रास्ता नहीं बनाएगा —
तुझे खुद पत्थर तोड़कर रास्ता बनाना होगा!
“अब दर्द से डरना बंद कर।
अब रुकना बंद कर।
अब सपना देखना नहीं — उसे जीना शुरू कर!”
खुद से वादा कर आज…
- आज के बाद कोई बहाना नहीं।
- आज के बाद कोई लेट उठना नहीं।
- आज के बाद कोई डर, कोई शर्म, कोई टालमटोल नहीं।
या तो उड़ जा, या फिर खुद को कोसता रह उम्रभर!
🔥 तू आग है… जल, और पूरी दुनिया को रोशन कर! 🔥
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